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उदास पहाड़ों में उम्मीद के...
Posted On 01/09/2008 08:49:08

प्यारी घुघूति जैलि मेरी मांजी तैं पूछि एैलि पहाड़ के इस लोकगीत में छिपी उदासी कठोर से कठोर हृदय को भी पिघला देती है। उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल के लोकजीवन की बात हो और उसमें घुघुती का जिक्र न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। पहाड़ में सुख-दु:ख, संयोग-वियोग, खुद, प्यार-दुलार, त्याग और वहां की संपूर्ण संस्कृति से घुघुती का अटूट रिश्ता है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गढ़वाल-कुमाऊं के लोकगीतों में इसे समान रूप से प्रमुखता मिली है। पर्वतीय अंचल में सभी जगह पाई जाने वाली घुघुती ही एकमात्र ऐसा पक्षी है, जिसका यहां के संपूर्ण जनमानस और संवेदनाओं के साथ बेहद करीबी संबंध है। पहाड़ की माटी के रंग में रची-बसी और दिखने में बेहद सुंदर घुघुती की घूर-घूर बरबस ही अपनी ओर खींचती है। यह आज से नहीं बल्कि सदियों से पहाड़ी लोकजीवन का अहम् हिस्सा है। यही वजह है कि लोकरंग में जितना महत्व घुघुती को मिला है, उतना किसी अन्य पक्षी को नहीं। लोकगीतों का ही जिक्र करें तो प्यारी घुघूति जैलि मेरी मांजी तैं पूछि एैलि. लोकप्रिय खुदेड़ गीत आज भी आंखों को नम कर देता है। देश के आन-बान- शान की हिफाजत को सरहद पर तैनात अपने फौजी पति की यादों में खोई उसकी पत्नी घुघुती की घूर-घूर सुनते ही कह उठती है-ना बास घुघुती घूर-घूर, स्वामि जयां छन दूर-दूर..। घुघुती के उड़ने पर पति याद में उदास पत्‍‌नी को उसका संदेशा पति तक पहंुचने की अनुभूति होती है। ना बासा ना बासा, घुघुती न बासा, अमै की डाई मां घुघुती न बासा.., घुघुती घुरौण लैगे मेरा मैत की, बौडि़-बौडि़ ऐगे ऋतु चैत की., ना बास घुघुती चैत की खुद लगीं च मां मैत की. समेत अन्य तमाम लोकगीत आज भी कर्णप्रिय हैं। ये सभी सुख-दु:ख, संयोग-वियोग, रैबार, खुद, स्नेह आदि से जुड़े हैं। यानी पहाड़ के कण-कण से गहरा नाता है घुघुती का और यह पहाड़वासियों के दिलों पर राज करती है। लोगों का कहना है कि पहाड़ी संस्कृति में रची-बसी घुघुती के संरक्षण के लिए भी सरकारी स्तर पर प्रयास होने चाहिएं।

 http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=43&edition=2008-08-31&pageno=3


Tags: घुघुती Ghughuti


कई लोगों की शहादत के बाद...
Posted On 13/06/2008 05:43:15
उत्तराखंड राज्य आसानी से नहीं मिला है इसके लिये कई बार बंद और चक्काजाम की मार यहां की जनता को झेलनी पड़ी. इस आन्दोलन में लगभग 50 आन्दोलनकारी शहीद हुए.

उत्तराखंड के संघर्ष से राज्य के गठन तक जिन महत्वपूर्ण तिथियों ने भूमिका निभायी वे इस प्रकार हैं- आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मई 1938 में तत्कालीन ब्रिटिश शासन मे गढ़वाल के श्रीनगर में आयोजित कांग्रेस के अधिवेशन में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस पर्वतीय क्षेत्र के निवासियों को अपनी परिस्थितियों के अनुसार स्वयं निर्णय लेने तथा अपनी संस्कृति को समृद्ध करकने के आंदोलन का समर्थन किया. सन् 1940 में हल्द्वानी सम्मेलन में बद्रीदत्त पाण्डेय ने पर्वतीय क्षेत्र को विशेष दर्जा तथा अनुसूया प्रसाद बहुगुणा ने कुमांऊ गढ़वाल को पृथक इकाई के रूप में गठन की मांग रखी.

1954 में विधान परिषद के सदस्य इन्द्रसिंह नयाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविन्द बल्लभ पंत से पर्वतीय क्षेत्र के लिये पृथक विकास योजना बनाने का आग्रह किया तथा 1955 में फजल अली आयोग ने पर्वतीय क्षेत्र को अलग राज्य के रूप में गठित करने की संस्तुति की. वर्ष 1957 में योजना आयोग के उपाध्यक्ष टीटी कृष्णमाचारी ने पर्वतीय क्षेत्र की समस्याओं के निदान के लिये विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया. 

12 मई 1970 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा पर्वतीय क्षेत्र की समस्याओं का निदान राज्य तथा केन्द्र सरकार का दायित्व होने की घोषणा की और 24 जुलाई 1979 में पृथक राज्य के गठन के लिये मसूरी में उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना की गयी. जून 1987 में कर्ण प्रयाग के सर्वदलीय सम्मेलन में उत्तराखंड के गठन के लिये संघर्ष का आह्वान किया तथा नवंबर 1987 में पृथक उत्तराखंड राज्य के गठन के लिये नयी दिल्ली में प्रदर्शन और राष्ट्रपति को ज्ञापन एवं हरिद्वार को भी प्रस्तावित राज्य में शामिल करने की मांग की गयी.


Extract from Net

अलोक की सहायता करो
Posted On 29/04/2008 05:48:40

आलोक एक मासूम १२ साल का बच्चा जो कि ह्रदय बीमारी से पीड़ित है, अपनी जिंदगी और मोत से झूझ रहा है. इस बच्चे को ये पता नही है कि अगर उसका इलाज नही हो पाया तो आगे उसके साथ क्या होने वाला है, वो इस बात से बेखबर है कि मोत हर पल उसके सर पर मंडरा रही है, पता नही कब उसकी साँसे उसका साथ छोड़ दे. आलोक पिछले ४ सालों से इस बीमारी से ग्रसित है, घरवालों ने बहुत इलाज करवाया, छोटे बड़े अस्पतालों में, लेकिन फ़िर भी कोई फायदा न मिला. पिताजी ने अपनी सारी पूँजी बेटे का जीवन बचाने में खर्च कर दी लेकिन अब असहाय हैं, सारी आशा निराशा में बदलती जा रही है. आलोक के पिताजी के चेहरे पर कुछ पल के लिए मुस्कान  तब आई जब दिल्ली के किसी अस्पताल के चिकित्सक ने कहा कि हम आलोक का इलाज कर सकते है. लेकिन ये मुस्कान थोडी देर बाद गायब हो गई जब अस्पताल ने कहा कि इसके पूरे इलाज में २-3 लाख का खर्चा आएगा. अब जिस ब्यक्ति के पास २ जून की रोटी खाने के लिए पैसे नही है वो इतनी बड़ी रकम का इंतजाम कैसे कर पायेगा. क्या ये मासूम अपनी जिंदगी केवल इसीलिए गवा देगा कि उसके पिता के पास पैसे नही थे उसके इलाज के लिए? आलोक के पिता एक बेरोजगार है जो कि अब अपने बेटे का इलाज करने में असमर्थ है.

 

मैं ब्याक्तिगत आप सभी लोगों से इस फॉरम के माध्यम से विनती करता हूँ कि यदि आप लोग आलोक का जीवन बचने में कुछ कर सकते है तो जरूर आगे आयें.

 

आप लोग ज्यादा जानकारी लेने के लिए सीधे आलोक के पिताजी से भी सम्पर्क कर सकते है. उनका मोबाइल न. है ०९४१०१३०४७७

 

मुझे आशा ही नही वरन पूर्ण विश्वास है कि आप लोग जरूर आलोक की जिंदगी बचाने में अपना सहयोग जरूर देंगे.


Free Medical Check-UP Camp
Posted On 26/03/2008 04:08:14

Dear Friends,

I m glad to announce that after a successful Free Heart Check-up Camp at Bhikyasen, YU is organizing another medical camp .


This Free Medical Check-up Camp will be organized at Jakholi, Rudraprayag in collaboration with the Metro Hosptial, New Delhi.

Vanue - Goverment Hospital Jakholi Block, Distt- Rudraprayag,


Date - 26th & 27th April.

Yadi aap logon me se koee es event ko successful banane ke liye apni taraf se kuch contribution karna chahte hai, wo mujhse sampark kar sakte hai.Aapki choti si madad kisi ke jeewan me ujala laa sakti hai.Esliye dosto apne haath aage badaooo aur es camp ko successful banane ke liye apna sahyog pradaan karo.


Regards

Subhash Kandpal



पलायन के चलते वीरान हुआ...
Posted On 10/03/2008 00:10:36

रूद्रप्रयाग। जिले के अधिकांश दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में पलायन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। खंडहर में तब्दील होते पौराणिक काष्ठ कला से निर्मित अधिकांश आशियाने पलायन की दास्तां बयां कर रहे है। इसका जीता जागता उदाहरण है तल्लानागपुर क्षेत्र का गरसारी गांव।

जनपद रुद्रप्रयाग के अंतर्गत गरसारी गांव कभी अपना विशिष्ट स्थान रखता था। सिंचित खेती व केला उत्पादन में इस गांव की अलग पहचान थी। अस्सी के दशक में यहां हुए भारी भूस्खलन ने इस गांव का नक्शा ही बदल दिया। हालांकि इस भूस्खलन से गांव में कोई जनहानि तो नहीं हुई थी, मगर यहां की उपजाऊ सिंचित भूमि नष्ट हो गई। भू कटाव के कारण यहां से लोगों का पलायन शुरू हो गया। देखते ही देखते वर्तमान में करीब तीस से चालीस परिवारों का यह गांव महज छह-आठ परिवारों तक सिमट गया। बेहतर शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं व इन ग्रामीण क्षेत्रों के यातायात सुविधा से न जुड़े होने से पलायन थमने का नाम नहीं ले रहा है। गरसारी निवासी कुसुम पुरोहित का कहना है कि भूस्खलन ने गांव की तस्वीर ही बदल दी है। दैवीय आपदा से ग्रामीणों की सिंचित भूमि नष्ट होने व यातायात, शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव होने से लोगों बेहतर जीवन जीने के लिए अन्य क्षेत्रों में पलायन करने को मजबूर हैं। वहीं क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता उम्मेद सिंह बुटोला मानते है की इस गांव में हो रहे पलायन का मुख्य कारण बुनियादी सुविधाओं का न होना है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदा से ग्रामीणों को हुई क्षति का सरकार द्वारा कोई मुआवजा नहीं दिया गया था। ऐसे में आजीविका की तलाश में पलायन जरूरी हो गया। इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि पृथक राज्य गठन के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन लगातार जारी है। रोजगार की आशा में लोग शहरी क्षेत्रों के लिए पलायन को मजबूर है और गांव में महज बुजुर्गो के आशियाने मात्र रह गये है।

Tags: Uttarakhandrudraprayagjagran News


पहाडी लोक गीत
Posted On 29/02/2008 05:42:47
उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोक गायक और गीतकार श्री नरेंदर सिंह नेगी जी द्वारा गाए गए कुछ प्रसिद्ध पहाडी गीत

गायक : नरेन्द्र सिंह नेगी

चिठ्युं का आखर अब ज्यू नि बेल मोंदा, बुसील्या रैबार तेरा आस नी बंधौन्दा -२
ऐजदी भग्यानी, ऐजदी भग्यानी -२
ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२
ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२

रांका बाल बाली काली रात नि ब्याणी, मेरी रात नि ब्याणी ।
रात नि ब्याणी, मेरी रात नि ब्याणी ।
उंसी का बुंदुन चुची तीस नि जाणी मेरी तीस नि जाणी ।
तीस नि जाणी मेरी तीस नि जाणी ।
पंद्रह पचिस्या दिन सदानि नि रौंदा -२
ऐजदी भग्यानी अर..र..र..र..र.र..र..रा..
ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२
ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२

रुड्युं का घामुन खैरया आंसूनी सुखदा, भगी आंसूनी सुखदा ।
आंसूनी सुखदा, भगी आंसूनी सुखद ।
जेट की बरखा न पाडु छोयां नी फ़ुटदा भगी छोरि छोयां नी फ़ुटदा ।
छोयां नी फ़ुटदा छोरि छोयां नी फ़ुटदा ।
बारमास फ़ूल खिल्यां डाल्युं मां नि रौंदा-२
ऐजदी भग्यानी छांटो रे छाटो रे छांटो छाटो..
ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२
ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२


आस को आसरो तेरी खुद ज्यूणो सारो, भगी खुद ज्यूणो सारो ।
खुद ज्यूणो सारो, भगी खुद ज्यूणो सारो ।
जथा हिटूं त्वे जथैईं बाटु फारु-फ़ारु, चुची बाटु फारु-फ़ारु ।
बाटु फारु-फ़ारु, चुची बाटु फारु-फ़ारु ।
मन का मन्युल बैठ बैठि नी पुरयोंदा -२
ऐजदी भग्यानी सरर.ररर... सरको रे सरको..
ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२
ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२


दिलै सूण मैन मान घंघतोल म न पोड़, भगी घंघतोल म न पोड़ ।
घंघतोल म न पोड़, भगी घंघतोल म न पोड़ ।
धाकना धरी कि अऊ खैंचताणि छोड़, छोरि खैंचताणि छोड़ ।
खैंचताणि छोड़, छोरि खैंचताणि छोड़ ।
मोल भऊ जांचि पुछी माया नी मोल्योंदा -२
ऐजदी भग्यानी सा..बा.. से साबा.. से..
ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२
ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२
ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा, ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा ।
ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा, ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा ।

2

नायू नायू बयो छा

नायू नायू बयो छा

हेय जिकेह बेह ना करा -2
मथू मथू जौला
नायू नायू बयो छा, मीठि मीठि छवी लागोला -2

हेय टिलेय दी घमा घम -2
सारा सारी जौला
फूक तौन लोली छवीयुँ, डेरे मा लागोला -2
नायू नायू बयो छा, मीठि मीठि छवी लागोला -2

कन कवे हिटना मीं, उचा संदला इचीं -2
उफला की पता उनी, उनी रूडीयूँ का दिन
चला ड्वे जाना एजी
चला ड्वे जाना डाला चेलू बैठी जौला
नायू नायू बयो छा, मीठि मीठि छवी लागोला -2

बंदी होसीना कर -2
हीते लेयडी सारा सर
नंगा खोटों हित, संदील बटुआ मा धार
यूँ गनियों यखी -2
भूखी मोरी जौला
फूक तौन लोली छवीयुँ, डेरे मा लागोला -2
नायू नायू बयो छा, मीठि मीठि छवी लागोला -2

पैड़ली का बता लेया, बाक़ी बातन का चाया -2
बंदी कमचूस नवा, सुना ज़रा बैठा भवेंया
मोटोर मा पैठ रखी
मोटोर मा पैठरी सेअत मा बैतरोला
नायू नायू बयो छा, मीठि मीठि छवी लागोला -2
फूक तौन लोली छवीयुँ, डेरे मा लागोला -2

भोल परसूयू बीतीं, पूंगदियों जान तीन -2
कानू कवे ख़ाली छुचि, कुमली हाथ खुतियूँ
हाल एह चीन ज्वानी मा -2
बूढ़ें-दान क्या होला
फूक तौन लोली छुइउ, डेरे मा लागोला -2
नायू नायू बयो छा मीठि मीठि छवी लागोला -2

फूक तौन लोली छुइउ, डेरे मा लागोला -2
नायू नायू बयो छा मीठि मीठि छवी लागोला -2

3

ना बैठ, ना बैठ, बिंदी ना बैठ चरखी मा
ना बैठ, ना बैठ, बिंदी ना बैठ चरखी मा
बोल्युं माँन मेरो, बिंदी ना बैठ चरखी मा
ना बैठ, ना बैठ, बिंदी ना बैठ चरखी मा

बांझा को अछानू बिंदी, बांझा को अछानू
बांझा को अछानू बिंदी, बांझा को अछानू
चरखी वालो मेरो भईजी
तेरू लग्दा जिठानू, बिंदी ना बैठ चरखी मा
ना बैठ, ना बैठ, बिंदी ना बैठ चरखी मा
बोल्युं माँन मेरो, बिंदी ना बैठ चरखी मा

दही कि परोठी बिंदी, दही कि परोठी
दही कि परोठी बिंदी, दही कि परोठी
चरखी टूटी जाली बिंदी,
तू छे भरी मोटी, बिंदी ना बैठ चरखी मा
ना बैठ, ना बैठ, बिंदी ना बैठ चरखी मा
बोल्युं माँन मेरो, बिंदी ना बैठ चरखी मा

देब्तों कु भोग बिंदी, देब्तों कु भोग
देब्तों कु भोग बिंदी, देब्तों कु भोग
ऊजिया सरील तेरो
क्या बोलाला लोग, बिंदी ना बैठ चरखी मा
ना बैठ, ना बैठ, बिंदी ना बैठ चरखी मा
बोल्युं माँन मेरो, बिंदी ना बैठ चरखी मा

रोटी को फ्फुडो बिंदी, रोटी को फ्फुडो
रोटी को फ्फुडो बिंदी, रोटी को फ्फुडो
बिदेसी मुलुक चोरी,
कवी नीच अपुनो, बिंदी ना बैठ चरखी मा
ना बैठ, ना बैठ, बिंदी ना बैठ चरखी मा
बोल्युं माँन मेरो, बिंदी ना बैठ चरखी मा
ना बैठ चरखी मा, हे ना बैठ चरखी मा
हे ना बैठ चरखी मा

4

भलु लगदु बनुली तेरु माठु-माठु हिटणु हे भलु लगदु । -२

हिटणु ऐथर हेरणु पैथर, हरकणु-फ़रकणु भलु लगदु भलु लगदु ।

भलु लगदु मोहना तेरु हैंसी-हैंसी बच्याणु रे भलु लगदु । -२

हैसणु-हैसणु मयालु बच्याणु छुंयुँ मा अलझ्याणु भलु लगदु भलु लगदु ।



भलु लगदु बनुली तेरु माठु-माठु हिटणु हे भलु लगदु ।

भलु लगदु मोहना तेरु हैंसी-हैंसी बच्याणु रे भलु लगदु ।



हाथ थमाली-थमाली कु बेंडुं , हाथ थमाली-थमाली कु बेंडु ।

तेरी कराली हिटायी बनुली , करिगे कोरी जिकुड़ी मा छेंडुं ।-२

हिटणु ऐथर हेरणु पैथर, हरकणु-फ़रकणु भलु लगदु भलु लगदु ।

भलु लगदु मोहना तेरु हैंसी-हैंसी बच्याणु रे भलु लगदु ।

भलु लगदु बनुली तेरु माठु-माठु हिटणु हे भलु लगदु ।



खायी काखड़ी-काखड़ी मा लोण, खायी काखड़ी-काखड़ी मा लोण ।

मोहना तेरी छुंयुँ मा उलझी, मिन न घर न बण की रौण ।-२

हैसणु-हैसणु मयालु बच्याणु छुंयुँ मा अलझ्याणु भलु लगदु भलु लगदु ।

भलु लगदु बनुली तेरु माठु-माठु हिटणु हे भलु लगदु ।

भलु लगदु मोहना तेरु हैंसी-हैंसी बच्याणु रे भलु लगदु ।



स्योन्दु सिंदुर-सिंदुर की बेंदी, स्योन्दु सिंदुर-सिंदुर की बेंदी ।

बनुली ब्याली तिन सेवा नि लायी, बनुली आज हुंगुरु नि दियेन्दी ।-२

हिटणु ऐथर हेरणु पैथर, हरकणु-फ़रकणु भलु लगदु भलु लगदु ।

भलु लगदु मोहना तेरु हैंसी-हैंसी बच्याणु रे भलु लगदु ।

भलु लगदु बनुली तेरु माठु-माठु हिटणु हे भलु लगदु ।



भरी गागरी-गागरी मा पाणी, भरी गागरी-गागरी मा पाणी ।

गौं का बाटा-घाटो मा मोहना, लम्बी-लम्बी धवड़ी नि लाणी ।-२

हैसणु-हैसणु मयालु बच्याणु छुंयुँ मा अलझ्याणु भलु लगदु भलु लगदु ।

भलु लगदु बनुली तेरु माठु-माठु हिटणु हे भलु लगदु ।

भलु लगदु मोहना तेरु हैंसी-हैंसी बच्याणु रे भलु लगदु ।



खाय़ी नारंगी-नारंगी की दाणी, खाय़ी नारंगी-नारंगी की दाणी ।

बनुली मेरा हिया मा तू छैयी , तेरा हिया मा कु होलु कु जाणी । -२

हिटणु ऐथर हेरणु पैथर, हरकणु-फ़रकणु भलु लगदु भलु लगदु ।

भलु लगदु मोहना तेरु हैंसी-हैंसी बच्याणु रे भलु लगदु ।

भलु लगदु बनुली तेरु माठु-माठु हिटणु हे भलु लगदु ।



हौल निसुण-निसुण कु बाणु, हौल निसुण-निसुण कु बाणु ।

मेरी बिन्सरी की धाण छुटद , मोहना रात सुंया मि नि आणु । -२

हैसणु-हैसणु मयालु बच्याणु छुंयुँ मा अलझ्याणु भलु लगदु भलु लगदु ।

भलु लगदु बनुली तेरु माठु-माठु हिटणु हे भलु लगदु ।

भलु लगदु मोहना तेरु हैंसी-हैंसी बच्याणु रे भलु लगदु ।

भलु लगदु बनुली तेरु माठु-माठु हिटणु हे भलु लगदु ।

भलु लगदु मोहना तेरु हैंसी-हैंसी बच्याणु रे भलु लगदु ।

भलु लगदु बनुली तेरु माठु-माठु हिटणु हे भलु लगदु ।

5

मेर डण्डि कण्ठियों का मुलुक जैल्यु, बसन्त रितु मा जैयि -२
हैर बण मा बुराँसि का फूल, जब बण आग लगाण होला..
पीता पखों थैं फ्योलिं का फूल, पिन्ग्ला रंग मा रंग्याण होला ..
ळाइयां पैयां ग्वीराल फूलु ना-२, होलि धर्ति सजि देखि ऐइ
बसन्त रितु म जैयि
मेर डांडि....

रन्गील फागुन होल्येरोन कि टोलि, डांडि कांठियों रंग्यणि होलि...
कैक रंग म रंग्युं होलु क्वियि, क्वि मनि-मन म रंग्श्याणि होलि..
किर्मिचि केसरि रंग कि बाढ-२, प्रेम क रंगों मा भीजि ऐइ...
बसन्त रितु म जैयि….
मेर डांडि....

बिन्सिरि देय्लिओं मा खिल्दा फूल, राति गों-गों गितेरुं का गीत...
चैता का बोल, ओजियों का ढोल, मेरा रोंतेला मुलुके कि रीत...
मस्त बिग्रैला बैखुं का ठुम्का-२, बांदूं का लस्सका देखि ऐइ....
बसन्त रितु म जैयि...
मेर डंडि....

सैणा दमला र चैतै बयार, घस्यरि गीतों मा गुंज्दि डांडि...
खेल्युं मा रंग-मत ग्वेर छोरा, अट्क्दा गोर घम्डियंदि घंडि..
वखि फुन्डे होलु खत्युं मेरु भि बच्पन, -२ ऊक्रि सक्लि त ऊक्रि कि लैयि...
बसन्त रितु म जैयि...

मेर डण्डि कण्ठियों का मुलुक जैल्यु, बसन्त रितु मा जैयि -२

6

चम चमा चम, चम चम , चम चम,चम चमकि , चमकि , चम चमकि घाम काँठीयूं मा
हिंवांली काँठी चांदि कि बणी गैनी, हिंवांली काँठी चांदि कि बणी गैनी
बणी गैनी, बणी गैनी
हिंवांली काँठी चांदि कि बणी गैनी, हिंवांली काँठी चांदि कि बणी गैनी ।

शिब का कैलाशु ग्यायी पैली पैली घाम , शिब का कैलाशु ग्यायी पैली पैली घाम
सेवा लगौणु आयी बदरी का धाम , बे बदरी का धाम, बे बदरी का धाम
सर.. फैली , फैली , सर.. फैली घाम डाँडों मा
भौन, पंक्षि, डांडि, डालि वोटि बिजी गैनी, भौन, पंक्षि, डांडि, डालि वोटि बिजी गैनी
बिजी गैनी , बिजी गैन
हिंवांली काँठी चांदि कि बणी गैनी, हिंवांली काँठी चांदि कि बणी गैनी ।


ठण्डु-मठु चड़ी घाम , फूलु कि पाखियुं मा, ठण्डु-मठु चड़ी घाम , फूलु कि पाखियुं मा
लगि कुतग्यली तौंकी नाँगि काख्युं मा बे
नाँगि काख्युं मा, बे नाँगि काख्युं मा
खिच्च हैसिनी, हैसिनी, खिच्च हैसिनी फूल डालियुं मा