मेरी होटल की नौकरी ,,,इस गीत को अपने आवाज दी है , साहब सिंह रमोला ने एल्बम का नाम है सकला !!! इस गाने मैं , हम जैसे लोगों की ,जिंदगी का वर्णन किया गया है कि किस पारकर से लोग होटल कि नौकरी करते हैं और कितनी तखलीफ़ , सहनी पड़ती है , कब दिन होता है और कब रात , पता ही नहीं चलता है, कब दिवाली आती है और कब होली भी अपने रंग बरसा कर चली जाती है
मेरी होटल कि नौकरी , हो सुवा बीराणा देस मा !
खाणु न पैणु मैंकू , हो सुवा तेरी यादूकि मेस मा !!
मनकी प्यारी बीराणा देस मा
सूबैर ब्याखुनी होंदी काम कि मार !
मन जर्सी सफू कि रंदी मन मा ड़ार !!
खणक खुला नि खै सकदा !
सैनक तैं फसौरी का नि सै सकदा !!
फसयाँ छाँ हमू सैफू का दगडा मा , हो सुवा , गुलामी का भैस मा
मन कि प्यारी दूर विदेस मा
बीराणा देस मा अफडाकवी नि लगदा !
गाली बिना कवी मनखी बची नि सकदा !!
चुला धुवां कु सदनी कु साथ !
घाम देखण कखन भीतर होंदी रात !!
होटलू का भीतर हो सुवा हीटाना छाँ रेस मा , मनकी प्यारी दूर विदेस मा
रुप्यों का बाना देस छोड़ी यूँ च !
ब्वे बाबु भै बन्दुसी मुख मोड़ी यूँ च !!
गौं मुलुक , डांडा कांठा कखान देखण !
ये निठुर देस मा क्या सुपिनु सजौन !!
आज भोल गणदु छौं दिन हो सुवा कब ओलू अफडा देस मा , दुखी छों प्यारी बीराणा देस मा
बग्वाल , होली बार त्यौवार , ख़ुद मा तुमारी जिया उदास
हरियाली होली बस्ग्याल मैना !
मेरी यादु मा रोणु नि त्वैन !!
ब्वे बाबु कि सेवा मा , हो सुवा लग्युं रण मेस मा प्यारी सुवा ,मेरी होटल कि नौकरी , बीराणा देस मा
नेगीजी ने इस गाने को अपनी सुरीली आवाज मैं गया है , इस मैं , किसी की शादी होने जा रही है लेकिन ,उसको पता नही है की उसकी होने वाली दुल्हन कैसी होगी , यानी की आज भी हमारे देवभूमि उत्तराँचल मैं , येसा होता है , और हम सिर्फ़ उसको अपने ख्वाबों मैं उसका वेर्णन कर सकते है
इन्नी होली ,की उन्नी होली ,मेरी सौन्जद्य हो बान्द, कुजानी कनी होली
लाला वेहली ,बुरांस ,जनी,
की फ्योंली जनि पिंगली व फ्योंली जनी पिंगली
डाली जनि सुड सुड या सी , लग्गुली सी कुंगली ,हो हो .......
फूल जनि स्वानी वेहली व ,मायलु परानी , इन्नी वेहली , कि उन्नी वेहली , हो हो .......
नागपुर चमोली वेहली व ,कि बलुदी सी कोणी कि , हो हो ...
टेहरी जौंपुर्य व्हेली व ,कि गौन्दगी सी नौणीकि , हो हो ...मेरी सौन्जद्य व बान्द कुजनी कनी वेहली ....
रवें , जौनसार व्हेली व कि चौंद कोटिया सालयाँ व्हेली ,मेरी सौन्जदिया व बान्द कुजानी कनी व्हेली कि उनी ...
चौमसी हरियाली व्हेली कि ,व्हेली जौन सी उजाली चम् , जौन सी उजाली चम्
पानी जनि पथलि व्हेली व धौली जनि छली चम् हो हो धौली जनि छली चम्
रूप कि खजानी व्हेली व , इन्नी होली कि उन्नी होली , मेरी सौन्जद्य व बान्द कुजनी कनी होली