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कुछ दिन पैली देखी एक कौतिग, नेहरू स्टेडियम की छोटी पाह्डियो पर पाह्डियो को, ढोल दमौ , गीत प्रीत , मिठै सिठै, सब्बि- सुणी, करी, चाखी छै / पर ह्वैगी छै बिसर्या जमाना की बात, याद छा त नार्थ ब्लाक अर गुलाबीबाग का बस स्टैड, यस सर अर यूवर्स फेथ्फुल्ली का बीच, पहाडी कख हरची , मेरा छैल तै बि पता नि लगी कखी अन्ज्वाल (डन्ड्रियाल ) पढी जग्वाल (पारू) देखी अर्ध्ग्रामेश्वर (धस्माना) करी पर बिज्ल्वाण नि मिली- कौतिग मा मिन देखी बिकट दन्दालो बरसों कि बिस्म्रती को घास स्यू जल्डो भैर आये तब देखेणी पाअड अफू से भैर आइक मिन देखी त हकाणै ग्यो मि, येकुला चणा अर भड्भूजा का भाड कि कथा अबारे हि सच होणी थै पहाड़ त सब दिल्ली ऐगे, फिर मे यकुलु वापस, तबारे धरे कैन मेरा कान्ध ऐच हाथ, यु मै हि थौ अप्णू सान्स अफ्वी बधौणू पाड त फैल जालो दुनिया मा पाअड मा रै नि रै पर जुडियु रै रे जल्डो से मी आज भी जुड़यूँ छौ पहाड़ से मेरा पहाड़ से ||
मै क्लर्क हू , सरकारी श्रस्टी का आधार स्तम्भ, अनपढो के लिये पूर्ण ब्रह्म , अनादि काल से मेरा अस्तित्व है , यम राज के यहा भी ( चित्रगुप्त) मेरा प्रभुत्व है, समय के साथ साथ मैने भी विकास किया है, काय्स्थ , ्मुनिम , लिपिक से कलर्क तक का सफर तय किया है, चम्चागिरी धर्म है मेरा , ओवरटाइम कर्म है मेरा, बगल मे फाइलो की ढेरी, सामने कम्प्यूटर की भेरी, भारतीय परजातन्त्र तेरे लिए पुन्य प्रसाद हू मै , लार्ड मैकाले की आखरी याद हु मै अर्थशास्त्री मुझसे खौफ खाते है, पन्च वर्शीय योजनाओ की विफल्ता का मुझे प्रमुख कारण ठ्हराते है. सुबह देर से दफतर जाना, शाम को जल्दी घर आना, आधा घन्टा चाय पीने मे तो घन्टा भर लगाना, उस पर भी बोनस बोनस , डीए- डीए चिल्लाना उन्हे कौन बताए मै सब कुछ कर सकता हु क्लर्क से गवर्नर- जनरल बन सकता हू बस की क्यू मे अडे अडे , विस्व राजनीति पर बहस कर सकता हू खडे खडे, परमाणु कार्यकर्म , ड्ब्लूटीओ वार्ता, भारतीय हाकी - किर्केट, कौन कैसे जीतता, कैसे हारता, मै सब जानता हू , कैसे? चलो बताता हू, एक क्लर्क के ज्न्म की कथा सुनाता हू, जब एक भावी क्लर्क पैदा होता है, जग हसता है वो रोता है, माता लोरी देती है, पिता तान सुनाएगे- हम अपने लाड्ले को डाक्टर , इन्जिनियर, आए ए एस बनाएगे, प्बलिक स्कूल की खोज होती है, पर उनकी जेब रोती है हारकर- झकमारकर , सन्तोस कर लेते है, लाड्ले को म्युनिसिप्ळ्टी के स्कूल मे डालकर दस्वी मे साठ प्रतिसत, १२वी मे ५० और बीए मे ४५ प्रतिसत प्राप्त कर , वह लाल नाम कमाता है, पढा लिखा बेरोजगार कहलाता है, ओर दे डालता है , अधिकारी वर्ग की सैकडो प्रतियोगी प्ररीक्छाए , और वह किसी को भी लक्छ्म्ण रेखा की तरह पार नही कर पाता, और टूटता है , वह बाद हर इम्तिहान के, बामियान बुद्ध जैसे हाथ तालिबान के, और तब वह सर्व ग्यानी होकर, अपना चार्म खोकर, उतरता है स्टाफ सिलेक्स्न कमीशन के समरान्ग्न मे, और पहूचता है, सरकारी कार्यालयो के प्रान्ग्न मे रोज्गार पाते ही दोपाये से चौपाया होता है, फिर सन्त्तती होती है , फिर जेब रोती है----- और एक बार फिर वही स्ब कुछ दोहराया जाता है, ओर तब वक्त की याज्सेना (द्रोप्दी) हस कर कह्ती है, अन्धो के अन्धे और क्लर्को के क्लर्क और चलता रह्ता है नियती चक्र - चलता रहता है नियती चक्र .
Tags: ्क्लर्क
और हमे क्या करना है रोज सहर , तमाम दोपहर , नापना शहर के फुट्पाथो को. और शाम बैठ शहर ए पनाह पीना, गम गलत करना रातो को हालात ए दुनिया खराब है, मेरे गम से ज्यादा कही, ये भीड तो जला ही देती है बस्तिया, मै घुट्ने भी दू जजबातो को राह ए मन्दिरो मस्जिद मै गिर चुका हजारो बार , ठोकर ए राहे मयकदा कितनी अभी बाकि है, कोइ देखे मेरे खातो को
Tags: शायरी
1. कख राजुला सौक्यान आर कख दानपूर का ----- मतलब कह्ना राजा भोज और कह्ना गन्गु तेली 2. गन्गा मा का जौ - मुस्किल काम 3. बीरू लगी बीरू धार शीरू लगी शीरू धार मत्लब अपने अपने रास्ते पर चलना या अलग होना 4. निद्यो को घट्ट छीजो - जो किसी की मदद नही करता उसका अनाज पन्च्क्की से छीज कर बेकार चला जाता है 5. निबण्दी को गम्बू रसोया- मत्लब मज्बूरी का नाम------- 6. औरू की देखी लायी पैरी अपनी देखी नान्गी, स्ये बुबा कू मरी , स्या ही किले नि मान्गी 7. बैरी का बाछरू , पिजाया को सुख 8. घुट्दौ त गिच्चू फूकेन्द , थूक्दौ त दूद च 9. त्तातो दूद हूणो 10. खाणु गुड , बथौणू पिन्ना 11. दान का गोरू सिन्ग ना खूर 12. नाति नन्तान पूत सन्तान (बहुत लम्बे समय तक) 13. भौरो को कलेऊ कैन खायी कि खाणो 14. था था थुमि होणू (मामला शान्त होना) 15. सिन्ग पल्येणो ( लड्ने पर अमादा होना) 16. सुन्गर का पोथलू खारा की पाण - जन्म जात आदत
17. गल्ला ना पल्ला द्वी द्वी ब्यौ करला 18. कन्टर बान्धणु - समान सहित गान्व से बाहर निकाल्ना 19. चन्द्रैण करना / होणी - समाज से बाहर करना 20. चन्द्रैण करना / होणी - समाज से बाहर करना 21. बडा बैरी को बडू मान - बडे दुश्मन का खास ख्याल रखना 22. हुनतियालि डालि का चल्चला पात 23. नक्टा को नाक बित्ता भर कटॆ हाथ भर बढे 24. रान्डो का हेन पान्जा गौ पडेन बान्जा 25. ढुन्गा ही कोन्ग्ला हून्दा त स्याल भूखा मरदा 26. नो मन नदू कोन्का खोन ऊन्का यख छाछ मागन जौन 27. बिराली को सिखायौ बाग 28. माडू च पर मरद च टूटी च पर सड्क च 29. बिराला बाग कित्ल्डा नाग 30. तू ठ्गनी को ठ्ग मै जाती को ठ्ग 31. घून्डो घून्डू फूक्यै ग्याय फूकाण कख बिटे आयी 32. जख सौ सल्ली वख कभी न भल्ली 33. बेन्ड ऊतार्नू 34. सुद्दी सुद्दी की मुन्डाठेल 35. ओबरा का काला बाउन्ड का सट्ट 36. घोल मथो कर्नो 37. अति उछ्डू भतेडी क पडो - ज्यादा बनने वाले को नीचा देख्न पड्ता है 38. मून्डौ नौ कपाल - नाम बद्लने से कुछ फर्क नही पड्ता 39. सड्डी ढेबरी मूडी माडी पूछ की दा भ्या - हाथी निकल गया पूछ पे तकरार 40. हन्स ना कागा - मिट्टी का माधो 41.  अन्द्ययारा की मार खबर ना सार 42. गीत लग्णा - बदनामी होना 43. नौ धरेणा - बदनामी होना 44. आप घोडी, न बाप घोडी, बिराणी घोडी न दान्त तोडी- दूसरे की चीज वफा नही करती 45. खाया पिया तन रीझे, लिया दिया सन्ग चले 46. ब्वै बाबु का बिगाड्या नौ और चकडैतु का खोया गौ सुधरदा निन 47. सिल्लू हैका कि मौ खो, तैलू अपणी - ठन्डे मिजाज वाला दूसरे का नुक्सान करता है और गर्म मिजाज अपना 48. जोनि की जडी खाणु - अम्रर होना 49. मेरू भारी दोण नि सक्दू , बीस पाथा सक्दू- नाम बद्लने से फर्क पड जाना हालाकि काम वही रहता है 50. अफ्फु चौडा बाजार सान्ग्डो - अपने मे कमी, दोस दूसरे पर 51. जैकु बाबा रिक्क न खाये वू काला खुन्ड्का देखी क डरो - &n bsp;   ; दूध का जला छाछ फूक फूक कर पीता है 52- कागा कक्डादी रौ - पिन्नापकदी रौ - हाथी चलता रहाता है - कुत्ते भौकते रहते है ५३- कागा खाऊ त खाऊ निथर बिक्ख त बढाऊ
Tags: औखाणा
आन्खे खोली हुमने ऐसे बेरहम आसमा तले, धूप से बचना पडा छूपके अपने ही साये तले // वक्त क्यो खा जाता है हर शय को दीमक की मानिद, आज फिर मिले मुझे कुछ चेह्ररे , उसके मसले कुचले // आग मे ज्अल कर कुन्दन होते होन्गे किस्मत वाले, राख ही हुए हम , चाहे जितनी बार जले//
Tags: तिक्का
देली मा मेरी कू ढोली गे फूल्कन्डी उदास गीतू की कैन दिलायी मैकु याद उलारया रितु की कुछ हि दिन रै गेन अब जुग जाण मा ना कैन बग्ड्वाल लाणु, ना औणी कै याद , भरणा अर जीतू की कान्ठ्यो बान्सुली , चौक मन्डाण चैती बहार , चोदिसी रसाण तरसदी च वू दिनू को आज , जुकडी मै अधीतू की
अन्ध्यारा मा हिट्णु रौ सदानी आस मा बिन्सरी का गैणा की, खुट्टो अबत ऐ ग्याय रफत उन्दार उकाल सैणा की, आज तई जु रड्क्दी च जुकडी का कोणा मा, खेल बाळ्यो मा ध्ररी थै तस्वीर वी मैणा की, या बात और च कि मेरा हात कुछ नि लगे बाट्ण को त मैम ही ल्यै छा वू भरी कुन्डी पैणा की /
Tags: पद
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शेर
Posted On 15/07/2008 04:19:25
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्हम तो धीरे धीरे पहुन्च ही जाते मान्जिल तक क्या खबर थी कि मन्जिल के भी पैर निकल आयेन्गे / यू लगता है देखकर जिस्म तेरा कसा हुआ कोइ शहर है जैसे करीने से बसा हुआ
Tags: ्मन्जिल
१- दिल है मेरा प्यार कि किताब, ह्र्र सफ़ा खुला खुला आन्सुओ से धुला धुला / २- मस्तिश्क के सूने गलियारे मे हर विचार ईशा था सुली पर लट्का था ३- दिल्ली नही ये दिल था, फिर उजड के कैसे बसता तेरा गम छिपा के अश्को मे , बता कैसे मै हसता
Tags: Kavita Geet Drama
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