ताओ उवाच-
जब महान ईश्वर का विस्मरण होता है,तब लोक परोपकारिता और पडोसी धर्म की ओर मुड़ते हैं.जब ज्ञान की प्रतिष्ठा बढती है,तो दुनिया में ढोंगियों कीबाढ़ आ जाती है.जब कौटुम्बिक बंधन तोड़े जाते ह...

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Bunty Sardwal and raj singh rawat like this.जिस प्रकार धातुओं के समिश्रण की सफलता रसायनशास्त्र की शुद्धि का प्रमाण है,उसी प्रकार मृत्यु जीवन की कसौटी है.वह एक कश और ताव है,जिस पर हमारा आचार और चरित्र परखा जाएगा. यदि तू किसी के जीवन को परखना चाह>...
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जिन पूर्वजों ने ईश्वर का अनुसरण/आचारण किया,उन्होंने उसका उपयोग लोगों को चालाक बनाने केलिए नहीं बल्कि सरल और स्वाभाविक बनाने केलिए ही किया.लोगों पर शासन करने में सबसे बड़ी कठिन...
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जीवन काल और उसका प्रयोग.
जिस प्रकार पक्षियों को सुबह ,उल्लू को शाम,मक्खी को शहद और गिद्ध को शव प्रिय होता है,उसी प्रकार मनुष्य को जीवन प्रिय होता है. यद्यपि वह प्रकाशमान है,किन्तु ऑंखें चौधिया न
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rawat125 likes this.ताओ उवाच-
सारा जगत स्वीकार करता है और प्रतिज्ञा पूर्वक बतलाता है कि मेरा ताओ (दिव्य )मार्ग श्रेष्ठ अवश्य है पर है व्यर्थ. जिस कारण वह ऐसा व्यर्थ मालूम पड़ता है,वही उसकी श्रेष्ठता है...
ताओ उवाच-
समुद्र और बड़ी बड़ी नदियों में सभी नदी नालों का पानी इसलिए आ मिलता है कि वे गहरे होते है,यही उनकी श्रेष्ठता का मूल है.
इसी तरह लोगों पर शासन करने का इच्छुक तत्वदर्शी स्वयं को उनसे निम्...
सामाजिक या सामूहिक सुख और शान्ति न्याय पर आधारित है. प्रत्येक मनुष्य का आनंद का आधार इसी पर है कि वह अपने खून पसीने की कमाई और स्वयम उपार्जित सम्पति से आनंद का उपभोग करे.अत तू अपनी इच्छाओं और लालसाओ>...
ताओ उवाच-
जिसका धैर्य साहस में प्रकट होता है,वह शीघ्र ही मरण को प्राप्त होता है.
जिसका धैर्य आत्मसंयम में व्यक्त होता है,वह सुरक्षित रहता है.
इस तरह धैर्य दो तरह का है, ईष्ट और अनिष्ट.
इ...
ताओ उवाच-
पृथ्वी पर पानी सा सौम्य और नम्र दूसरा नहीं,किन्तु कठोर और मजबूत वस्तु को गलाने-घिसाने में भी उसके जैसा कोई नहीं. यह निसंदिग्ध है, इसमें विकल्प के लिए कोई अवकाश नहीं.
दुनिया जानती...
दिव्य ताओ की स्थिति नौसिखिए शिकारी के धनुष के झुकने जैसी है.
वह ऊपर वाले को नीचे खींचता है, और नीचे वाले को ऊपर उठता है.
जहाँ अधिकता हो, वहाँ से वह निकाल लेता है और जहाँ कमी हो वहाँ पूरी करता ह...
यदि दौलत एकत्र करने की लालसा के बाद दूसरा कोई निकृष्टतम विकार है, तो वह है धन का अपब्य्य. धन को व्यर्थ के कामों में खर्च करने वाला वास्तव में दरिद्र नारायण को उनके सत्व से वंचित करता है, क्योंकि ईश्वर>...
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