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sck4784
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Subhash Kandpal

mem_staff OFFLINE
Male
24 years old
Delhi
India
Profile Views: 3602
[ 424 ]


JOB: Working
SMOKE: No
DRINK: No
RELIGION: Hindu
DATING STATUS: Looking
BODY TYPE: Average
DISTRICT IN UTTARAKHAND: Rudraprayad
MEMBER SINCE: 27/04/2007
STAR SIGN: Cancer
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Traveling,Listening to old hindi music,reading magazines,watching movie & TV news channels,taking part in social activities

Munna Bhai MBBS, Lage Raho Munna Bhai, Babul, Bhagwan

Pahari/Garhwali/Kumaoun, Old hindi songs

26/03/2008 04:08:14


MUSIC MASTI AUR DHOOM, GharwaliFriendFun, Careers Opportunities, Website Design Development







मैं सुभाष काण्डपाल (Subhash Kandpal), उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिल्ले के एक बहुत खूबसूरत गाँव बैंजी कांडई (Bainji Kandai) का रहने वाला हूँ. अगर कोई मुझसे पूछे कि तुम्हारी सबसे पसंदीदा जगह कोन सी है, तो मैं बस यही कहूँगा कि वो मेरा गाँव है. मेरा गाँव ही मेरा स्वर्ग है. अपने लोगों से बात करने, उनसे जान पहिचान बढाने, सुख-दुःख बाटने में एक अजीब सी सुकून की अनुभूति होती है, इसलिए इस साईट पर आप लोगों के बीच में आया हूँ. आशा करता हूँ कि आप लोगों को भी मेरा साथ पसंद आएगा, हम सभी लोग एक दूसरे के सुख-दुःख में हाथ बटायेंगे, एक दूसरे की भावनाओं को समझेंगे, उनकी क़द्र करेंगे और मोज मस्ती के साथ साथ कुछ अच्छा कार्य भी करेंगे जो कि हम सभी के लिए और हमारी आने वाली पीड़ी के लिए हितकर होगा.



जय भारत जय उत्तराखंड


मेरे ब्लॉग से मिलिये

कुछ हम भी अर्ज करते हैं



मेरे प्यार की वो हद पूछते है
दिल में कितनी जगह है,ये पूछते है,
चाहते है हम सिर्फ़ उन्ही को क्यो इतना
उसकी भी वो हमसे वजह पूछते है!





जिंदगी में सदा हंसते रहो
हंसना जिंदगी की जरूरत है
जिंदगी को जियो इस अंदाज में
कि देख तुझे सब कहें जिंदगी कितनी खूबसूरत है




तमन्ना है उन्हें सिर्फ एक बार मिलने की
और कोई ख्वाहिश नहीं इस दीवाने की
शिकवा उनसे नहीं खुदा से है
क्या जरूरत थी उनको इतना प्यारा बनाने कि




कु्छ लम्हे कुछ एहसास मिटाये नही जाते
कुछ मीठी यादों के पल भुलाये नही जाते
कुछ नजरें ही खुद कह जाती हैं
हर अलफाज़ सुनाये नही जाते




गुजरे हुए कल की याद आती है
कुछ लम्हों से आंखे भर आती हैं
वो सुबह रंगीन वो शाम निराली जाती है
जब आप जैसे दोस्तों की याद आती है




रुकवा देना जनाजा जब उनका घर आये
शायद वो झांक लें खिड़की से और मेरा दिल धड़क जाये....

ये पंकित्यां उतराखंड से तो सम्बनिधत तो नही हैं, ये मेरे मन के भाव हैं, जो मैं इस कविता के माधयम से ब्य्क्त्त करना चाहता हूं.



हाथ जोड़ीक करले पूजा,

मुंड झुके दे आज तू

कुछ नि होलु ए मनखी,

छोड़ी दे घमंड तू II



यखी तेरी माया रोली,

धन सगुणी पुंगणी हे

मुटठी बोटीक आयी इख,

हाथ पसारी जोलु हे II



ना बडू यख ना छोटु कोई,

देह सब समान च

धर्म सबका अपना अपना,

खून सबको लाल च II



पंच तत्त्वौं की काया तेरी,

ना कर अभिमान तू

इक भी त्त्वैते छोड़ी दयोली,

ह्व्वे जालु हे खाक तू II




भूखे की भूख मिटे दे,

प्यासे की प्यास तू

दुखियारौं को दुख मिटे दे,

कमैं ले इ पुन्या तू II




ना कर तू ईश्या द्वेष,

वाणी को हराश तू

चार घड़ी की सांस तेरी,

बांट ले खुशियां तू II




इस कविता में पूजा का मतलब भगवान की पूजा करने से नही है, ब्लकि उन कर्मौ को करने से है, जो भगवान को प्रिय लगते है.




मेरे ब्लॉग से मिलिये

पर पीड़ा से छलक उठे मन, यह छलकन ही गंगा जल है
दुख हरने को पुलक उठे मन, यह पुल्कन ही तुलसीदल है




कार्य उद्यम से सिद्ध होते है, मनोरथो से नही।

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sck4784 has 66 friend(s)



Displaying 5 out of 38 comments
07/09/2008 07:44:00
आदर पूर्वक मनुहार
प्रिय मित्र

SIKKIM SE से आपके DOSTका नमस्कार,

यहाँ सब कुशल- मंगल है, आशा है आप ख़ैरियत से होंगे |
निवेदन यह है की, मैं आप को याद दिलाना चाहता हूँ की, मैं आप के " दोस्त श्रेणी " का सदस्य हूँ | तथा आप का मित्र होने के नाते मुझे आप की चिंता होती रहती है | और आप का COMMENTS भी बहुत दिनो से नही आया | अतह आप से अनुरोध है की आप समय - समय अपना हाल चाल बता दिया करें |
धन्यवाद




01/09/2008 12:28:34
बचपन का ज़माना होता था.........
खुशियों का खजाना होता था..
चाहत चाँद को पाने की थी ,
दिल तीतली का दीवाना होता था...?
रोने की ना कोई वजह होती थी,
ना हँसने का कोई बहाना होता था....???
खबर न थी कुछ सुबह की,
ना शामो का ठीकाना होता था ???
दादी की कहानी होती थी
परियों का फ़साना होता था ??? .
पेड़ों की शाखाएं छुते थे
मिटटी का खिलौना होता था ??
गम की जुबान ना थी
ना ज़ख्मों का पैमाना होता था ???
बारिश में कागज़ की कश्ती, दोस्तों से मस्ती ...
और हर मोसम सुहाना होता था
वो खेल वो साथी होते थे
हर रिश्ता  निभाना होता था ??
खेल- खेल में दोस्तों से रूठना, पल भर की दुश्मनी
और दूसरी सुबह वही साथी और खेल पुराना होता था ???
वो बड़े बुजुर्गों की डांट .. स्कूल मास्टर का डर
फिर माँ के आँचल में छुपकर सो जाना होता था??
हलवे की सोंधी खुशबू, माँ के हाथ का चूरमा
मेरे नखरे, मिठाई की जिद और पापा का पुचकार कर खिलाना होता था ???
दिन भर लुक्का छुपी, गिल्ली- डंडा, समंदर ....
कितना निराला, कोमल, "पुष्कर " का बचपन दीवाना होता था ????

यार वो क्या ज़माना होता था...


01/09/2008 11:24:04
DON ke COMMENTS ka intzaar to 11 mulko ke GUEST BOOK kar rahe hain..............

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lekin.........

DON ke COMMENTS ko padna MUSHKIL hi nahi NAMMUNKIN hai.....



28/08/2008 02:58:17
FRIENDSHIP_..._ ..._(... (  ...).._
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•.¸¸.•♥´¨`♥•.¸Some friends are like a Flower•.¸¸.•♥´¨`♥•.¸
and when they finally bloom•.¸¸.•♥´¨`♥•.¸they wilt away•.¸¸.•♥´¨`♥•.¸
in just one day •.¸¸.•♥´¨`♥•.¸and some times just by noon•.¸¸.•♥´¨`♥•.¸
Some friends are like a cloudy day •.¸¸.•♥´¨`♥•.¸
and when the sun's in sight•.¸¸.•♥´¨`♥•. 


27/08/2008 11:05:52
दोस्ती हम यूं ही नही कर बैठे,

क्या करे हमारी पसंद ही कुछ "ख़ास" है. .

चिरागों से अगर अँधेरा दूर होता,

तोह चाँद की चाहत किसे होती.

कट सकती अगर अकेले जिन्दगी,

तो दोस्ती नाम की चीज़ ही न होती.

कभी किसी से जीकर ऐ जुदाई मत करना,

इस दोस्त से कभी रुसवाई मत करना,

जब दिल उब जाए हमसे तोह बता देना,

न बताकर बेवफाई मत करना.

दोस्ती सची हो तो वक्त रुक जता है

अस्मा लाख ऊँचा हो मगर झुक जता है

दोस्ती मे दुनिया लाख बने रुकावट,

अगर दोस्त सचा हो तो खुदा भी झुक जता है.

दोस्ती वो एहसास है जो मिटती नही.

दोस्ती पर्वत है वोह, जोह झुकता नही,

इसकी कीमत क्या है पूछो हमसे,

यह वो "अनमोल" मोटी है जो बिकता नही . . .

सची है दोस्ती आजमा के देखो..

करके यकीं मुझपर मेरे पास आके देखो,

बदलता नही कभी सोना अपना रंग ,

चाहे जितनी बार आग मे जला के देखो ........ 



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