श्री नरेंदर सिंह नेगी जी ने ये जो गाना गया है सायद हम लोगों के ऊपर सही लागू होता है , उसी गाने की ये पंक्तियाँ मैं यहाँ लिखा रहा हूँ
दुरु पर्देसू छूँ , उम्मा तवे तैं मेरा सुऊं , हे भूली न जेई, चिट्ठी , देणी रई
राजी खुसी छों मैं यख , तू भी राजी रही तख
गौं गोलू मा चिट्ठी खोली , मेरी सेवा सौंली बोली
हे भूली न जेई , चिट्ठी देणी रैइ
घाम पाणी मा न रै तू
याखुली डंडियों न जै तू
दुखयारी न हवे जै कखी ,सरिल कु ख्याल रखी, खानी पैनी खाई
हे भूली न जेई , चिट्ठी देणी रैइ
हुंदा जू पांखुर मैं मा , उड्डी औंदु फुर तवे मा
बीराना देस की बात , क्यच उम्मा मेरा हात , हे भूली न जेई , चिट्टी देणी रैइ
नेगीजी ने इस गाने को अपनी सुरीली आवाज मैं गया है , इस मैं , किसी की शादी होने जा रही है लेकिन ,उसको पता नही है की उसकी होने वाली दुल्हन कैसी होगी , यानी की आज भी हमारे देवभूमि उत्तराँचल मैं , येसा होता है , और हम सिर्फ़ उसको अपने ख्वाबों मैं उसका वेर्णन कर सकते है
इन्नी होली ,की उन्नी होली ,मेरी सौन्जद्य हो बान्द, कुजानी कनी होली
लाला वेहली ,बुरांस ,जनी,
की फ्योंली जनि पिंगली व फ्योंली जनी पिंगली
डाली जनि सुड सुड या सी , लग्गुली सी कुंगली ,हो हो .......
फूल जनि स्वानी वेहली व ,मायलु परानी , इन्नी वेहली , कि उन्नी वेहली , हो हो .......
नागपुर चमोली वेहली व ,कि बलुदी सी कोणी कि , हो हो ...
टेहरी जौंपुर्य व्हेली व ,कि गौन्दगी सी नौणीकि , हो हो ...मेरी सौन्जद्य व बान्द कुजनी कनी वेहली ....
रवें , जौनसार व्हेली व कि चौंद कोटिया सालयाँ व्हेली ,मेरी सौन्जदिया व बान्द कुजानी कनी व्हेली कि उनी ...
चौमसी हरियाली व्हेली कि ,व्हेली जौन सी उजाली चम् , जौन सी उजाली चम्
पानी जनि पथलि व्हेली व धौली जनि छली चम् हो हो धौली जनि छली चम्
रूप कि खजानी व्हेली व , इन्नी होली कि उन्नी होली , मेरी सौन्जद्य व बान्द कुजनी कनी होली