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चि� ्युं का आखर अब ज्यू नि बेल मोंदा, बुसील्या रैबार तेरा आस नी बंधौन्दा -२ ऐजदी भग्यानी, ऐजदी भग्यानी -२ ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२ ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२
रांका बाल बाली काली रात नि ब्याणी, मेरी रात नि ब्याणी । रात नि ब्याणी, मेरी रात नि ब्याणी । उंसी का बुंदुन चुची तीस नि जाणी मेरी तीस नि जाणी । तीस नि जाणी मेरी तीस नि जाणी । पंद्रह पचिस्या दिन सदानि नि रौंदा -२ ऐजदी भग्यानी अर..र..र..र..र.र..र..रा.. ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२ ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२
रुड्युं का घामुन खैरया आंसूनी सुखदा, भगी आंसूनी सुखदा । आंसूनी सुखदा, भगी आंसूनी सुखद । जेट की बरखा न पाडु छोयां नी फ़ुटदा भगी छोरि छोयां नी फ़ुटदा । छोयां नी फ़ुटदा छोरि छोयां नी फ़ुटदा । बारमास फ़ूल खिल्यां डाल्युं मां नि रौंदा-२ ऐजदी भग्यानी छांटो रे छाटो रे छांटो छाटो.. ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२ ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२
आस को आसरो तेरी खुद ज्यूणो सारो, भगी खुद ज्यूणो सारो । खुद ज्यूणो सारो, भगी खुद ज्यूणो सारो । जथा हिटूं त्वे जथैईं बाटु फारु-फ़ारु, चुची बाटु फारु-फ़ारु । बाटु फारु-फ़ारु, चुची बाटु फारु-फ़ारु । मन का मन्युल बै� बै� ि नी पुरयोंदा -२ ऐजदी भग्यानी सरर.ररर... सरको रे सरको.. ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२ ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२
दिलै सूण मैन मान घंघतोल म न पोड़, भगी घंघतोल म न पोड़ । घंघतोल म न पोड़, भगी घंघतोल म न पोड़ । धाकना धरी कि अऊ खैंचताणि छोड़, छोरि खैंचताणि छोड़ । खैंचताणि छोड़, छोरि खैंचताणि छोड़ । मोल भऊ जांचि पुछी माया नी मोल्योंदा -२ ऐजदी भग्यानी सा..बा.. से साबा.. से.. ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२ ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा-२ ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा, ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा । ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा, ऐजदी भग्यानी ईं ज्वानि का छौन्दा । गायक : नरेन्द्र सिंह नेगी एलबम: ऐजदी भग्यानी
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चम चमा चम, चम चम , चम चम,चम चमकि , चमकि , चम चमकि घाम काँ ीयूं मा हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी, हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी बणी गैनी, बणी गैनी हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी, हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी ।
शिब का कैलाशु ग्यायी पैली पैली घाम , शिब का कैलाशु ग्यायी पैली पैली घाम सेवा लगौणु आयी बदरी का धाम , बे बदरी का धाम, बे बदरी का धाम सर.. फैली , फैली , सर.. फैली घाम डाँडों मा भौन, पंक्षि, डांडि, डालि वोटि बिजी गैनी, भौन, पंक्षि, डांडि, डालि वोटि बिजी गैनी बिजी गैनी , बिजी गैन हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी, हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी ।
ण्डु-म ु चड़ी घाम , फूलु कि पाखियुं मा, ण्डु-म ु चड़ी घाम , फूलु कि पाखियुं मा लगि कुतग्यली तौंकी नाँगि काख्युं मा बे नाँगि काख्युं मा, बे नाँगि काख्युं मा खिच्च हैसिनी, हैसिनी, खिच्च हैसिनी फूल डालियुं मा भौंरा पोथला रंग-मत बणी गैनी, भौंरा पोथला रंग-मत बणी गैनी बणी गैनी , बणी गैनी हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी, हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी ।
डांडि-काँ ि बिजाली , पौंछि घाम गौं मा, डांडि-काँ ि बिजाली , पौंछि घाम गौं मा सु-निंद पौडि छै, बेटी ब्वारी डेरों मा बे ब्वारी डेरों मा, बे ब्वारी डेरों मा झम्म झौल , झौल , झम्म झौल लगी आखियुं मा मायादार आंखियुं का सुपिन्या उड़ी गैनी, मायादार आंखियुं का सुपिन्या उड़ी गैनी उड़ी गैनी , उड़ी गैनी हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी, हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी ।
छुँयुं मा मिसे गिन पंदेरो मा पंदेनी, छुँयुं मा मिसे गिन पंदेरो मा पंदेनी भाँडी भुरेगिनी तौंकी छुँई नी पुरेनी बे छुँई नी पुरेनी, बे छुँई नी पुरेनी खल्ल ख़ते , ख़ते, खल्ल ख़ते घाम मुखडि़युं मा पितल्याणा मुखड़ी सोना की बणी गैनी, पितल्याणा मुखड़ी सोना की बणी गैनी बणी गैनी , बणी गैन हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी, हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी ।
दोफ़रा मा लगी जब बणु मा घाम तैलू, खोपरा मा लगी जब बणु मा घाम तैल बै ि गिनी घसेनी बिसै की डाला छैल बिसै की डाला छैलु , बिसै की डाला छैलु गर्र निंद , निंद , गर्र निंद पोडी़ छैलु मा आयि पतरोल अर घसेनी लुछे गैनी, आयि पतरोल अर घसेनी लुछे गैनी बणी गैनी , बणी गैनी हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी, हिंवांली काँ ी चांदि कि बणी गैनी ।
ब्यकुनी को सिलु घाम पैटण बै ी गे, ब्यकुनी को सिलु घाम पैटण बै ी गे डाडियुं का पेछेडि जोन हैसण बै ी गे बे हैसण बै ी गे, बे हैसण बै ी गे झम्म रात , रात , झम्म रात पोडी़ रौलियुं मा भौन, पंक्षि, डांडि, डालि वोटि सेयी गैनी, भौन, पंक्षि, डांडि, डालि वोटि सेयी गैनी सेयी गैनी, सेयी गैनी भौन, पंक्षि, डांडि, डालि वोटि सेयी गैनी, भौन, पंक्षि, डांडि, डालि वोटि सेयी गैनी भौन, पंक्षि, डांडि, डालि वोटि सेयी गैनी, भौन, पंक्षि, डांडि, डालि वोटि सेयी गैनी...... गायक : नरेन्द्र सिंह नेगी एलबम: बुरांश
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हल्द्वानी(नैनीताल)। पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि पर्यटन विकसित करने के लिए सरकार विशेष प्रयास कर रही है। कुमाऊंनी व गढ़वालीव्यंजनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। शीघ्र ही उत्तराखंड विश्व पटल पर पर्यटन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण छवि बनाने में सफल होगा। मंत्री श्री पंत यहां आम्रपाली इंस्टीट्यूट में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय फ्रेश मास्टर्स शेफ कम्पटीशन के शुभारंभ पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। श्री पंत ने कहा कि उत्तराखंड के परंपरागत व्यंजन विदेशी व्यंजनों से कम नहीं हैं। बस जरूरत है इनके विधिवत प्रचार व प्रसार की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब साढ़े चार हजार होटल हैं, इनके मीनू में पारंपरिक व्यंजनों को शामिल करने को प्रदेश सरकार प्रयास करेगी। इसके लिए शीघ्र ही कुमाऊं-गढ़वाल व्यंजन पर इसी वर्ष एक प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसमें होटल मैनेजमेंट से जुड़े राज्य के संस्थानों को शामिल किया जाएगा। राष्ट्रीय फ्रेश प्रतियोगिता को राज्य के लिए शुभ संकेत बताते हुए उन्होंने आम्रपाली संस्थान की सराहना की। उन्होंने कहा कि होटल मैनेजमेंट से संबंधित शिक्षा प्राप्त कर छात्र न सिर्फ राज्य को पर्यटन के क्षेत्र में विकसित कर सकेंगे, बल्कि इससे स्वरोजगार के अवसर भी मुहैया होंगे। आम्रपाली संस्थान के निदेशक प्रो. केके पांडे ने संस्थान में होने वाली गतिविधियों तथा भविष्य के प्रस्तावित कार्यक्रमों की जानकारी दी। एचएम संस्थान के उपनिदेशक प्रो. एसके सिंह ने बताया कि देश भर के 14 होटल मैनेजमेंट संस्थानों की टीमों के करीब 80 प्रतिभागियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के अध्यक्ष सीएल ढींगरा ने मुख्य अतिथि को शॉल ओढ़ाकर तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया।
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अल्मोड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सांस्कृतिक कला दल के प्रचार वाहन को यहां विकास भवन से हरी झंडी दिखाकर डीएम निधिमणि त्रिपाठी ने रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये लोगों तक कार्यक्रम की जानकारी एक सशक्त माध्यम साबित होगा। प्रचार वाहन व सांस्कृतिक दल को रवाना करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिये कि दल के कार्यक्रमों का आयोजन ऐसे स्थानों पर किया जाय जहां पर अधिक से अधिक संख्या में ग्रामीण इसे देख सकें। इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी हासिल कर योजना का लाभ उठा सकें। मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि यह नाटय दल विकासखण्ड मुख्यालय हवालबाग, बसौली, ताकुला, सोमेश्वर, बिन्ता, द्वाराहाट, चौखुटिया, मासी, भिकियासैंण, स्याल्दे, सल्ट, मरचूला, मछोड़, भतरौंजखान, ताड़ीखेत, कठपुड़िया, शीतलाखेत, दन्यां, भैंसियाछाना, गैराड़, अल्मोड़ा, लमगड़ा में कार्यक्रम प्रस्तुत करेगा। उन्होंने बताया कि प्रचार-प्रसार के लिए सांस्कृतिक दल को लाउडस्पीकर व प्रचार सामग्री के साथ रवाना किया गया है। दल ने कुमाऊंनी भाषा में योजना से संबंधित सांस्कृतिक कार्यक्रम तैयार किये गये है। जिनसे आसानी से जनता लाभान्वित हो सकेगी।
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भिकियासैंण(अल्मोड़ा)। युवा मंच के तत्वावधान में भूमिधार टानी में बसंतोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान उत्तराखंड लोक मंच के कलाकारों की कुमाऊंनी व गढ़वाली लोक गीत-नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अवकाश प्राप्त अधिकारी इन्द्र सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस मौके पर मंच के कलाकारों ने ग्रीश पपनै के निर्देशन में एक से बढ़ कर एक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दीं। कुमाऊंनी रंगोली ने खूब रंग जमाया। संयोजक दर्शन कड़ाकोटी ने सहयोग के लिये सबका आभार व्यक्त किया।
सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। महिला मंगल दल लखनाड़ी, गोल्ने मढ़ी तथा बरगला की अनेक महिलाओं ने जंगलों की सुरक्षा अभियान के तहत अपने क्षेत्र के जंगलों में टोलियां बनाकर भ्रमण किया। महिलाओं ने बताया कि वन विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण जंगलों में काफी अवैध कटान हो रहा है। विभाग की वनाग्नि सुरक्षा को विभाग की प्रथम जिम्मेदारी बताते हुए कर्मचारियों से नियमित जंगलों की गश्त लगाने मांग की है। महिलाओं ने ग्रामीणों के हक-हकूक कम किये जाने को भी जंगलों के विनाश का कारण बताया।
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उत्तरकाशी। गंगोत्री क्षेत्र के दर्जनों गांव इन दिनों बर्फ से ढके हुए हैं। इस साल जमकर हुए हिमपात से यहां रहने वाले लोगों चेहरों की रंगत बढ़ी हुई है। विश्व प्रसिद्ध धाम गंगोत्री मार्ग पर दोनों किनारों पर स्थित गांव इन दिनों बर्फ से ढके हुए हैं। जमकर हुए हिमपात से लोग भले ही अपने घरों से कुछ दूरी ही तय कर पा रहे हों, लेकिन उनके चेहरों पर सुबह की धूप की तरह ताजगी है। मुखवा, धराली, हर्षिल, बगोरी, झाला, सुक्की टॉप, समेत अन्य स्थानों में रह रहे लोगों का कहना है कि यह बर्फ खेती के लिए वरदान है। नारायण सिंह नेगी, जय भगवान सिंह, संजय, महेश पंवार समेत अन्य का कहना है कि बर्फवारी के बाद पेयजल व्यवस्था पर असर पड़ा है। लोग हर साल की तर्ज पर पेयजल जुटा लेते हैं। उनका कहना है कि इस बर्फवारी से भले ही मुश्किलें बढ़ी हों किन्तु बर्फ खेती के वरदान साबित होगी। बर्फ से जहां खेतों के हानिकारक कीट समाप्त होंगे, वहीं सेब, राजमा समेत अन्य फसलों को नव जीवन मिलेगा।
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देहरादून। उत्तराखंड में निवास करने वालों के आई कार्ड बनाए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने इसके लिए मुख्य सचिव से परीक्षण कराने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित राज्य सुरक्षा आयोग की मुख्यमंत्री खंडूड़ी की अध्यक्षता में हुई दूसरी बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई। इस दौरान सुरक्षा विशेषज्ञों, अफसरों और जनप्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि उत्तराखंड में आई कार्ड की व्यवस्था की जा सकती है। इस व्यवस्था के अमल में आने के बाद जहां सूबे में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हो सकती है, वहीं राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस व बैंक में खाता खोलने के लिए यह पहचान पत्र महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है। चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई है कि बाहरी लोगों के सत्यापन कराने में अक्सर पुलिस के सामने दिक्कतें आती है। यदि आई कार्ड बन जाएं तो यह परेशानी भी दूर हो सकती है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव एसके दास को इस प्रस्ताव का परीक्षण करने को कहा है। बैठक में सूबे की सुरक्षा से जुड़े अन्य पहलुओं पर चर्चा हुई। सीएम ने अफसरों को बार्डर पर विशेष चौकसी बरतने के साथ ही वहां पुलिस तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया। गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल में नेपाल में भी आम चुनाव होने जा रहे हैं, जिससे सीमा पर सुरक्षा तंत्र को सतर्क व सजग रहने का आवश्यकता है। यह बात भी सामने आई कि केंद्र से पुलिस आधुनिकीकरण से राज्य को सिर्फ 10 करोड़ रुपये मिल रहा है, जबकि केंद्र का प्रतिवर्ष आधुनिकीकरण का बजट 1200 करोड़ रुपये है। विशेषज्ञों ने सूबे के बजट को नाकाफी बताया और इस मद में केंद्र को लगभग 30 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजने का सुझाव दिया। बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय में पुलिस आधुनिकीकरण को लेकर बैठक भी होने जा रही है। सूत्रों के अनुसार पुलिस महकमे के पास मौजूद मैन पावर को तकनीकी रूप से मजबूत किया जाना चाहिए। इसके साथ ही सीमांत इलाकों में जहां पुलिस की व्यवस्था नहीं है। वहां सुरक्षा बंदोबस्त पुख्ता किया जाना चाहिए। बैठक में आगामी महाकुंभ को लेकर भी चर्चा की गई।
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दोस्तो एक नई पहाडी गढ़वाली गीत माला पहाडी संगीत के बाजार में आ गई है जिसका नाम है जोग जोगणी. जैसे आप लोग भली भाती जानते होंगे कि हमारे पहाडों में यह माना जाता है कि हमारे वनों, जंगलों में कई प्रकार के देवी देवता और बुरी आत्माएं निवास करते है और उनमे से वन देवी का अपना एक अलग ही महत्व है, कहते है कि ये वन देवियाँ हमारी आत्मा में प्रवेश करके हमें कई प्रकार की परेशानियाँ में डालती है. ये वन देवी कितने परकार कि होती है उन्ही का वर्णन इस कैस्सेट में एक गीत जोग जोगणी के मध्यम से संगीत बढ़ करके वर्णित किया गया है. इस गढ़वाली कैस्सेट में ८ गीत है जो जीवन के कई पहलुओं को मध्य नजर रखते हुए लिखे गए है.
गायक विपिन कांड पाल और कल्पना चोहान
गीत विपिन काण्ड पाल संगीत राजेंदर चोहान
आप लोगों से प्राथना है कि आप इसके सम्बन्ध में अपने मह्तावपूर्ण सुझाव गीतों को सुनने के उपरांत यहाँ पर जरूर देंगे.
आपके सुझाव की प्रतीक्छा जरूर करूँगा
Tags: Garhwali Casset Jog Jogni Garhwali Songs Garhwali Singer Vipin Kandpal
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