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बेदर्द च यु जमानु, फिर भी याद दिलाणु च.
न जाने ये सफर म, कै त बुलाणु च.
मिन आंखां बंद कर दिनी, तब भी रुलाणु च.
बेदर्द च यु जमानु, फिर भी याद दिलाणु च.
बचपन बितिगे ज्वानी एगे, फिर भी काट खाणु अआणु च.
सारी जिन्दगी नौकरी करी,फिर भी आस बंधाणु च.
की कखी त मिलेली वा,जीं का बाना कमाणु च.
बेदर्द च यु जमानु, फिर भी याद दिलाणु च.
माँ-बाप थें भूली ग्या हम,फिर भी एहसास दिलाणु च.
की हे मनखी यु त्यारा माँ-बाप छ, यूँ थे क्यान रुलाणु च.
माँ-बाप थें छोड़ की , तू ब्वारी ते मनाणु च.
यु उइए माँ-बाप छं जाऊँ ते ते जनम दिनी,आज त उन्ही ते भुलाणु च.
ये पाप करकी तू भुल्नु छ की, तू नरक म अपरा वास्ता जगह बनाणु च.
बेदर्द च यु जमानु, फिर भी याद दिलाणु च.
बिधाता बोलीं की ऐ लक्ष्मण क्यान तू,रूपया कमाणु च.
एक दिन यु ते ते छोड़ जाला,येही मी ते ते सम्झाणु च.
ये जमाना से डौर, ये ते ते बुलाणु च.
मिन फिर सोची, बेदर्द च यु जमानु, फिर भी याद दिलाणु च.
Created by Laxman Negi
Tags: BEDARD
मयारू मुलुक (मयारू गढ़वाल)
सोची की बड़ी हैरानी और परेशानी हौन्दि छ,मयारू गढ़वाल कख लुकी गे , एक दिन की बात छ मी आप्रू घौर का चौक का किनारा बाटिक अपनों गौं का उन सीदिनुमा पुन्ग्दा (खेत ) कु देखुनो छू जू की अब बंजर व्हागी. सोच्दु छो की उबी इंसान रही व्हाला जाऊँ इ पुन्ग्दा बडाई व्हाला इतगा मेहनत करना का बाद और आज हम दुनिया की चमक -धमक का खातिर सब छ छ्वादना. गौं की एडी -आछरी भी आंसू छान बौगना की यु मनखी जू कभी मी ते पूज्दु छ आज मी ते छोडेगे चली. कख चली वैट भी ख़ुद नि मालुम.देवतों का मन्दिर का अगाडी-पिछाडी घास च जमी.न क्वै उन मन्दिर को देख भाल कर्णु कु और न ही क्वै च पूजा कर्णौ कु. दूर ध्हार माँ लातु देवता कु ठान भी बंजर वही गे. उबी अपर वक्त कु रोनू छ. मेरा घौर समनी वाला देव सिंह चाचा कु माकन अब बिकुल खाली व्हा गई न जाने कख गई उनका नौनी -नौन्याव. उ माकन भी गुजरी वक्त की कहानी बताणु छ.दोस्तों हम सब अपरा घर बाटिक बहुत दूर छ जाया ये रोजी -रोटी कु तलाश म लेकिन हमारा कुल -देवतन हमते कभी नि बोली छ की तुम म -ते भूल जाया अपरी संस्कृति ते भूल जे. अपरा घौर ते भूल जाया जख तुमन अपरी जिन्दगी कु सुरुआत कनु ते अपरा आंखी खुलीं अपनी जनम देन वाई माँ ते माँ बोलीं , जय घौर का आँगन माँ तुमुं खेली करी , वे ही ते तुम छ्वान चना छ . उओ दिन भूल गे जब सब दोस्तों दगड तुम दूर बौन माँ ग्वैरों दगड जांदा छ और बौन माँ ही खिचडी पकुंदा छ और सब दोस्त मिल का खांदा छ. न जावा ये घर बार छोड़ की -न जावा ये मुलुक छोड़ी की , उ दिन दूर नि जब क्वै तिस्रो यख एकी अपरो राज कर देलु और तुमन तब देख्दु रे जान , ये मुलुक वास्ता लौट - जा , लौट जा ये एडी आछरी का वास्ता , लौट जा वी लातु देवता का वास्ता --लौट जा वी घौर का वास्ता जख बातिन तिन अपरी जिन्दगी सुरु कर छाई . लौट जा वी प्राईमरी स्कूल का वास्ता जख तू बोल्ख्या -पाटी ले कर पड़ना कु जांदू छ , एजा बौडी की एजा ..............म्यार आंसू नि छन थामना एजा --------------एजा --------------एजा -----------................
मी इन्तजार करना छ बेटा --------------------------------..... त्यारू अभागु गढ़वाल .
Soch k badi hairani or preshani haundi chh, myaru garhwal kakh luki gey, ek din ki baat chh me aapru ghaur ka chauk ka kinara batik, apno gaun ka un seedinuma pungda(khet) ku dekhuno chhau ju ki ab banjar whagi. sochdu chho ki ubi insaan rahi whala jaun ei pungda badayi whala itga mehnat krna ka baad or aaj hum duniya ki chamak-dhamak ka khatir sab chha chhwadna. Gaun ki edi-aachhri bhi aansu chhan baugana ki yu mankhi ju kabhi me te poojdu chh aaj me te chhodege chali, khakh chali waite bhi khud ni maalum. Devton ka mandir ka agadi-pichhadi ghaas ch jami. Na kwai ch un mandir ko dekh baal krnau ku or na hi kwai ch pooja karnau ku. Dur dhhaar ma Laatu devta ku thaan bhi banjar whai gayi. ubi apra waqt ku ronu chh. Mera ghaur samni wala Dev singh chacha ku makan ab bikul khali wha gayi, na jaane kakh gayi unka nauni-naunyaw. u makan bhi gujri waqt ki kahani batanu chha.
Dosto hum sab apra ghar batik bahut dur chha jaya ye roji-roti ku talash me lekin hamara kul-devtan hamtey kabhi na boli chh ki tum me-te bhul jaya apri sanskriti te bhul jaya, apra ghaur te bhul jaya, jakh tuman apri jindgi ku suruaat kanu te apra aankhi khulin, apni janam den waai maa te MAA bolin, jai ghaur ka aangan ma tumun kheli kri, we hi te tum chhwan chana chha. uo din bhul gay jab sab doston dagad tum dur baun ma gwairon dagad janda chha or baun ma hi khichdi pakunda chha or sab dost mil ka khanda chha., Na jawa ye ghar baar chhod ki-na jaawa ye muluk chhodi ki, u din dur ni jab kwai tisro yakh eki apro raj kar delu or tuman tab dekhtu re jaan, ye muluk wasta laut- ja, laut ja ye edi aachhri ka wasta, laut jaa wai Laatu devta ka wasta --laut jaa wai ghaur ka wasta jakh batin tin apri jindgi suru kr chai. Laut jaa wai primary school ka wasta jakh tu bolkhya-paati le kr padna ku jaandu chha, eja baudi ki eja.....myara aansu ni chhan thamna eja---eja----eja................
me intjaar krna chha beta..... Tyaru Garhwal.