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स्त्री पुरुष की दासी?
यह मानता कौन है?
बहू को दहेज के लिए जला कर
मारता कौन है?
बेटे की जिद के आगे
... बेटी की ख़्वाहिशें दबाता कौन
है?
कोंख में ही उस अभागन
को मिटाने में अस्पताल के चक्कर
लगाता कौन है?
...स्त्री पुरुष की दासी?
यह मानता कौन है?
बहू को दहेज के लिए जला कर
मारता कौन है?
बेटे की जिद के आगे
... बेटी की ख़्वाहिशें दबाता कौन
है?
कोंख में ही उस अभागन
को मिटाने में अस्पताल के चक्कर
लगाता कौन है?
बेटी को ससुराल में गाय बनकर
रहने के गुण सिखाता कौन है?
समाज की ऊँच-नीच के डर से
देहरी पर पहरा बिठाता कौन
है?
बेटा अगर किसी नारी के
प्रति अपराध करे तो उसे
छिपाता कौन है?
बेटी की ऊँची उड़ान पर
आपत्तियाँ उठाता कौन है?
समाज में व्यभिचार, और देह
व्यापार का चलन बढ़ाता कौन
है?
......जरा निष्पक्ष भाव से
सोचिए
क्या यह सब कुछ सिर्फ़ और
सिर्फ़ कोई पुरुष करता है?
या कोई सास, कोई ननद, कोई
माँ,
या कोई उन्मुक्त यौवना, कोई
गणिका
इस कर्म-काण्ड में बराबर
की साझी है
क्या आपने किसी स्त्री को इन
भूमिकाओं में नहीं देखा?
जरूर देखा होगा
तो फिर एक जायज समस्या को
नाजायज तर्कों में न उलझाएं
आज की स्त्री असुरक्षित है
लेकिन सिर्फ पुरुषों से नहीं
यह हमारी साझी समस्या है
वह स्त्री किसी पुरुष की भी
माँ है, बेटी है, बहन है, पत्नी है,
जीवनसंगिनी है, प्रेयसी है,
जीवन की डोर है
एक भावनात्मक
रिश्ता यहाँ भी है
आइए इस साझी समस्या पर
सिर जोड़कर सोचें
तभी रास्ता निकलेगा
और जरूर निकलेगा
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एक छोटी लड़की और उसके पिता एक पुल पार कर रहे थे;
पिता के डर की तरह था
इसलिए वह अपनी छोटी बेटी से पूछा:
"बेटी , कृपया इतना है कि मेरे हाथ पकड़;
आप नदी में गिर नहीं है .. "
...
छोटी लड़की ने कहा:
"नहीं...एक छोटी लड़की और उसके पिता एक पुल पार कर रहे थे;
पिता के डर की तरह था
इसलिए वह अपनी छोटी बेटी से पूछा:
"बेटी , कृपया इतना है कि मेरे हाथ पकड़;
आप नदी में गिर नहीं है .. "
...
छोटी लड़की ने कहा:
"नहीं, पिताजी. तुम मेरा हाथ पकड़. "
"क्या अंतर है?"
हैरान पिता पूछे.
"वहाँ एक बड़ा अंतर है,"
छोटी लड़की ने उत्तर दिया ..!
"यदि मैं अपना हाथ पकड़ और मुझे कुछ होता है,
संभावना है कि मैं अपने हाथ जाना हो सकता है.
लेकिन अगर तुम मेरा हाथ पकड़,
मुझे यकीन है कि कोई बात नहीं क्या होता है के लिए पता है,
तुम चलो मेरे हाथ जाना कभी नहीं होगा ..? "
नैतिक -:
किसी भी रिश्ते में,
ट्रस्ट के Sssence इसके बाँध में, लेकिन इसकी बॉण्ड में नहीं है.
तो व्यक्ति जिसे आप प्यार का हाथ पकड़;
बल्कि उन्हें तुम्हारा पकड़ करने के लिए उम्मीद की तुलना में ..
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असली टेंशन ..?
एक खुबसूरत हसीना रास्ते मे आपको लिफ्ट मांगती है
और आगे कुच्छ दूर जाने के बाद उसे चक्कर आने लगते है तो आप उसे हॉस्पिटल ले जाते है
डॉक्टर खुशीसे आपको कहता है '' बधाई हो आप बाप बनने व...असली टेंशन ..?
एक खुबसूरत हसीना रास्ते मे आपको लिफ्ट मांगती है
और आगे कुच्छ दूर जाने के बाद उसे चक्कर आने लगते है तो आप उसे हॉस्पिटल ले जाते है
डॉक्टर खुशीसे आपको कहता है '' बधाई हो आप बाप बनने वाले है ''
बस्स आपको टेंशन आता है
फिर आप बोलते हो '' लेकिन वो बच्चा तो मेरा नहीं है ''
लड़की बोलती है '' नहीं यही मेरे होनेवाले बच्चे का बाप है ''
आपको और टेंशन आता है
पुलिस आती है और आपका डी एन ऐ टेस्ट होता है. रिपोर्ट आता है. रिपोर्ट के मुताबिक ''आप
कभीभी बाप बन नहीं सकते है ''
आपको और जादा टेंशन आता है
किसी तरह भगवान का शुक्रिया अदा कर आप घर वापस लौटते है .
फिर आप सोचते है '' घर मे मुझे दो बच्चे है ... अगर मै बाप नहीं बन सकता तो वे फिर
किसके है? ''
अब ये सचमुच असली टेंशन वाली बात है ...
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माँ
माँ संवेदना है, भावना है, एहसास है, माँ जीवन के फूलो खुशबु का वास है, माँ रो...ते हुआ बच्चे का खुशनुमा पलना है, माँ मरुश्थल सभी नदी या मीठा सा झरना है, माँ लोरी है गीत है, प्यारी सी थाप है माँ, प...माँ
माँ संवेदना है, भावना है, एहसास है, माँ जीवन के फूलो खुशबु का वास है, माँ रो...ते हुआ बच्चे का खुशनुमा पलना है, माँ मरुश्थल सभी नदी या मीठा सा झरना है, माँ लोरी है गीत है, प्यारी सी थाप है माँ, पूजा की थाली है मंत्रो का जाप है, माँ आखों का सिसकता हुआ किनारा है, माँ गालो पर पप्पी है, ममता की धारा है, माँ झुलसते दिनों सभी कोयल की बोली है, माँ मेहँदी है कुमकुम. है सिन्दूर है रोली है माँ कलम है दा...वत है स्याही है माँ परमात्मा की सह में एक गवाही है माँ त्याग है, तपश्या है, सेवा है, माँ फूक से ठंडा की हुआ कलेवा है, माँ अनुष्ठान है, साधना है, जीवन का हवन है, माँ जिन्दगी के मोहल्ले सभी आत्मा का भवन है, माँ चूड़ी वाले हाथों के मजबूत कंधो का नाम है, माँ काशी है, कावा है, और चारो धाम है, माँ चिंता है, याद है, हिचकी है, माँ बच्चे की चोट सिश्की है, चूल्हा, धुआं रोटी और हाथों का छाला है, माँ जिन्दगी की कडवाहट सभी अमृत का प्याला है, माँ पृथ्वी है, जगत है, धुरी है, माँ बिना इस सुष्टि की कल्पना अधूरी है, और माँ का जीवन सभी पर्याय नहीं है, और माँ महत्त्व कम हो नहीं सकता और माँ जैसा दुनिया में कुछ हो नहीं सकता, सभी दुनिया की हर माताओ को प्रणाम करता हूँ
और कुछ लोगो को....
माँ की दवाई का खर्चा, उसे मज़बूरी लगता है उसे सिगरेट का धुंआ, जरुरी लगता है || फिजूल में रबड़ता , दोस्तों के साथ इधर-उधर बगल के कमरे में, माँ से मिलना , मीलों की दुरी लगता है || वो घंटों लगा रहता है, फेसबुक पे अजनबियों से बतियाने में अब माँ का हाल जानना, उसे चोरी लगता है || खून की कमी से रोज मरती, बेबस लाचार माँ वो दो...स्तों के लिए, शराब की बोतल, पूरी रखता है || वो बड़ी कार में घूमता है , लोग उसे रहीस कहते है पर बड़े मकान में , माँ के लिए जगह थोड़ी रखता है || माँ के चरण देखे , एक अरसा बीता उसका ... अब उसे बीवी का दर, श्रद्धा सबुरी लगता है || माँ की दवाई का खर्चा, उसे मज़बूरी लगता है उसे सिगरेट का धुंआ, जरुरी लगता है ||
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