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पत्थर से बातचीत
यूनानी विचारक डायोजिनीज घुमक्कड़ स्वभाव के थे। वे अपना ज्यादातर वक्त घूमने-फिरने में बिताया करते थे। वे सुकरात के शिष्य थे और उनके विचारों से बेहद प्रभावित थे। वे उन्हीं की तरह लोगों क...पत्थर से बातचीत
यूनानी विचारक डायोजिनीज घुमक्कड़ स्वभाव के थे। वे अपना ज्यादातर वक्त घूमने-फिरने में बिताया करते थे। वे सुकरात के शिष्य थे और उनके विचारों से बेहद प्रभावित थे। वे उन्हीं की तरह लोगों की समस्याओं का समाधान करने की भरपूर कोशिश भी करते थे। धीरे-धीरे डायोजिनीज की ख्याति भी दूर-दूर तक फैलती जा रही थी। वे अपने व्यक्तित्व में सुधार के लिए लगातार प्रयासरत रहते थे। कभी फूलों के पास जाकर उससे बातें करते तो कभी यों ही समुद्र के किनारे शांत मन से आंखें बंद कर ध्यान में लग जाते और अपने मन को नियंत्रित करने का प्रयास करते थे। एक दिन वह एक पत्थर की मूर्ति के पास गए और उससे बातें करते रहे।
एक युवक वहां से गुजर रहा था। डायोजिनीज जैसी हस्ती को एक पत्थर की मूर्ति से बातें करते देख वह हैरान रह गया। वह उनके पास जाकर बोला- महानुभाव, आपसे यह उम्मीद नहीं थी। हम लोग तो आपके व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने का प्रयास करते हैं और आप ऐसी ओछी हरकत कर रहे हैं। एक मामूली पत्थर से बातें करने का आखिर क्या मतलब है? भला एक पत्थर क्या जवाब देगा? किसी पत्थर से आप शराफत से बातें करो या बदतमीजी से, वह तो शांत ही रहेगा। युवक की बात सुनकर डायोजिनीज मुस्करा कर बोले- बिल्कुल सही कहा तुमने कि भला एक पत्थर क्या जवाब देगा? वह तो शांत ही रहेगा। तो मैं भी इस पत्थर से यही सीखने का प्रयास कर रहा हूं कि यदि मुझे कोई गालियां दे या अनुचित भाषा में बात करे तो मुझे इस पत्थर की तरह ही शांत रहना है। हर हाल में शांत बने रहना है। एक पत्थर से बेहतर यह सीख और कौन दे सकता है। कोई और हो तो मुझे भी बताओ। मैं उसके पास जाऊंगा। युवक डायोजिनीज की बात सुनकर दंग रह गया और मन ही मन उनकी साधना के प्रति नतमस्तक हो उठा।
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एक सड़ा सेब
एक होनहार युवक था , मगर उसकी संगति बहुत खराब थी। युवक के पिता ने उसे बुरे मित्रों का साथ छोड़ने को कई बार कहा पर युवक को खुद पर बहुत भरोसा था। उसका कहना था कि वह अपने मित्रों की बुरी आदतों...एक सड़ा सेब
एक होनहार युवक था , मगर उसकी संगति बहुत खराब थी। युवक के पिता ने उसे बुरे मित्रों का साथ छोड़ने को कई बार कहा पर युवक को खुद पर बहुत भरोसा था। उसका कहना था कि वह अपने मित्रों की बुरी आदतों को कभी नहीं अपनाएगा।
युवक के पिता अनुभवी थे। वे जानते थे कि बुरी संगत का असर पड़ना तो तय है, सो एक दिन उन्होंने अपने बेटे को समझाने का फैसला किया। वह बाजार गए और कुछ उम्दा नस्ल के सेब ले आए। उन्होंने सेब की टोकरी आलमारी में रख दी। उन्हीं सेबों के बीच उन्होंने एक सड़ा हुआ सेब भी रख दिया। उन्हें आलमारी में सड़ा सेब रखता देख पुत्र बोला- पिताजी, यह सड़ा हुआ सेब तो फेंकने लायक है, इसे क्यों आप आलमारी में रख रहे हैं। पिता ने कहा- अभी रहने दो। बाद में फेंक देंगे। दूसरे दिन पिता ने बेटे को आलमारी से सेब निकालकर लाने को कहा।
बेटा सेबों की टोकरी ले आया लेकिन जब सेबों पर उसकी नजर गई तो उसने देखा कि सभी सेब सड़ने लगे हैं। वह अपने पिता से बोला- पिताजी, कल तक तो सारे सेब ठीक थे पर एक ही दिन में ये सड़ने कैसे लगे? तब पिता ने जवाब दिया- बेटा, मैंने तुम्हें यही दिखाने के लिए इन सेबों के बीच वह सड़ा हुआ सेब रख दिया था। यही कुसंगति का प्रभाव है। एक सड़े सेब के कारण सारे अच्छे सेब भी खराब हो गए। इसी तरह बुरी संगति में अच्छे लड़के भी बिगड़ जाते हैं। बेटा पिता की बात समझ गया।
Sweta ji thnx....hume apna friends banane ke liye.....
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soooooooooo jaaaaaooooooooooooooo
bhai comliments to banta h...
bhandari ji apni pic bhi laga lo yaar...kab tak udhar m pic lete rahoge....
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koi hulchal nahi h bhai...bhole ka prasad le ke so gaye h kya........
HAPPY SHIVRATRI TO ALL MY FRIENDS...JAI BHOLE BHANDARI....
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BEAUTYIFUL GWALDAM