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और हमे क्या करना है
Posted On 23/07/2008 04:25:55 by dineshbijalwan

और हमे क्या करना है

 

रोज सहर ,  तमाम दोपहर , नापना शहर के फुट्पाथो को.

 

और शाम बैठ शहर ए पनाह पीना, गम गलत करना रातो को

 

हालात ए दुनिया खराब है, मेरे गम से ज्यादा कही,

ये भीड तो जला ही देती है बस्तिया, मै घुट्ने भी दू जजबातो को

 

राह ए मन्दिरो मस्जिद मै  गिर चुका हजारो बार ,

ठोकर ए राहे  मयकदा कितनी अभी बाकि है, कोइ देखे मेरे खातो को

Tags: शायरी



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