और हमे क्या करना है
रोज सहर , तमाम दोपहर , नापना शहर के फुट्पाथो को.
और शाम बैठ शहर ए पनाह पीना, गम गलत करना रातो को
हालात ए दुनिया खराब है, मेरे गम से ज्यादा कही,
ये भीड तो जला ही देती है बस्तिया, मै घुट्ने भी दू जजबातो को
राह ए मन्दिरो मस्जिद मै गिर चुका हजारो बार ,
ठोकर ए राहे मयकदा कितनी अभी बाकि है, कोइ देखे मेरे खातो को
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