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Tag: dhansingh

Viewing 1 - 5 out of 73 Blogs.
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ज्ञान, बुद्धि और स्मृति
Posted On 13/09/2008 18:32:13 by dhansing
ज्ञान, बुद्धि और स्मृति दोपहर ढलने को है। आकाश अभी खुला था, फिर जोर की हवाएं आयीं और अब काली बदलियों में वह ढका जा रहा है।
सूरज छिप गया है और हवाओं में ठंडक है।
एक फकीर द्वार... Read More



कागज के फूल
Posted On 13/09/2008 18:30:36 by dhansing
कागज के फूल एक मित्र कागज के कुछ फूल भेंट कर गये हैं। इन फूलों को देखता हूं- जो दिख रहा है, उसके पार उनमें कुछ भी नहीं है। उनमें सब कुछ दृश्य है, अदृश्य कुछ भी नहीं। और बाहर क्यारियों में गुलाब के... Read More



प्रेम ज्ञान है!
Posted On 13/09/2008 18:27:03 by dhansing
प्रेम ज्ञान है!
 
मेरा संदेश छोटा-सा है- ''प्रेम करो। सबको प्रेम करो। और ध्यान रहे कि इससे बड़ा कोई भी संदेश न है, न हो सकता है।''
मैंने सुना है : एक संध्या किसी नगर से एक अर्थी निकलती थी। बह... Read More



ॐ मंत्र है समस्त समस्याओं...
Posted On 06/09/2008 20:39:52 by dhansing
ॐ मंत्र है समस्त समस्याओं का समाधान ओम शब्द का हमारे शास्त्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। हर मंत्र के पहले ॐका उच्चारण किए जाने का विधान है। ओम के उच्चारण के बिना मंत्... Read More



शरीर में छिपा ईश्वर का संदेश
Posted On 06/09/2008 20:37:43 by dhansing
शरीर में छिपा ईश्वर का संदेश मनुष्य ईश्वर की सर्वोत्तम रचना है। मनुष्य की शारीरिक संरचना और अंग विशेष के कार्य भी ईश्वर के गहन मंतव्य को प्रकट करते हैं। यह सच है कि मानव शरीर क... Read More



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